कोंका कमार करमाली : टांगी से आजादी की लड़ाई लड़ने वाले उलगुलान के शहीद

कोंका कमर करमाली, जिनका वास्तविक नाम सोनाराम करमाली था, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक निडर और आक्रामक क्रांतिकारी थे।

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11/21/20251 min read

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कोंका कमर करमाली, जिनका वास्तविक नाम सोनाराम करमाली था, भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक निडर और आक्रामक क्रांतिकारी थे। 21 नवंबर 1863 को झारखंड के ओरमो गाँव में जन्मे, उन्होंने झारखंड, बंगाल और बिहार के लोहरा करमाली समुदाय को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिरसा मुंडा के उलगुलान विद्रोह से प्रेरित होकर, उन्होंने ब्रिटिश शासन को चुनौती देने के लिए हथियार निर्माण और गुरिल्ला युद्ध की तकनीकों का इस्तेमाल किया। उनकी स्व-निर्मित 'टांगी' (कुल्हाड़ी) उनका प्रमुख हथियार थी, जिससे उन्होंने कई ब्रिटिश सैनिकों और उनके सहयोगी जमींदारों का वध किया। ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा उन्हें पकड़ने या मारने के कई प्रयासों के बावजूद, वे हर बार बच निकलने में सफल रहे और स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान देते रहे। 8 जनवरी 1896 को उनका निधन हो गया, लेकिन इतिहासकारों द्वारा उनके योगदान को वह मान्यता नहीं दी गई जिसके वे हकदार थे।

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विस्तृत विश्लेषण

1. प्रारंभिक जीवन और पहचान

वास्तविक नाम: सोनाराम करमाली

प्रचलित नाम: कोंका कमर करमाली

जन्म तिथि: 21 नवंबर 1863

जन्म स्थान: ओरमो गाँव, कसमार ब्लॉक, बोकारो जिला, झारखंड

पहचान: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक निडर और आक्रामक क्रांतिकारी, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध संघर्ष किया।

2. स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका और नेतृत्व

बिरसा मुंडा और उलगुलान से प्रेरणा

कोंका कमर करमाली ने महान क्रांतिकारी बिरसा मुंडा के समकालीन उलगुलान विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिया। जब बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आदिवासी ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए संगठित हो रहे थे, उसी समय कोंका करमाली झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल की लोहरा करमाली जनजाति का नेतृत्व कर रहे थे। वह बिरसा मुंडा से गहराई से प्रेरित थे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने लोहारा कबीले को स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए एकजुट किया।

लोहरा करमाली जनजाति का एकीकरण

उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान झारखंड, बंगाल और बिहार के बिखरे हुए लोहरा करमाली समुदाय को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट करना था। उन्होंने इस समुदाय को संगठित कर स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित किया।

3. सैन्य कौशल और हथियार निर्माण

हथियार निर्माण की प्रक्रिया

कोंका कमर करमाली हथियार बनाने में माहिर थे। उन्होंने एक विशिष्ट तकनीक का उपयोग करके हथियार निर्माण का कार्य किया:

कच्चा माल: उन्होंने 'चितारिया पत्थर' को गलाकर 'बाली लोहा' प्राप्त किया।

निर्मित हथियार: इस लोहे का उपयोग करके उन्होंने तलवार, भाले, कुल्हाड़ी और तीर के सिरे जैसे हथियार बनाए।

आपूर्ति: इन हथियारों को स्वतंत्रता से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए बंगाल क्षेत्र में आपूर्ति किया जाता था।

युद्ध कौशल और 'टांगी'

वे युद्ध की विभिन्न कलाओं में पारंगत थे और तलवार, भाला तथा कुल्हाड़ी चलाने में विशेषज्ञता रखते थे।

प्रमुख हथियार: उनकी एक स्व-निर्मित 'टांगी' (कुल्हाड़ी) थी, जिसे वे हमेशा अपने साथ रखते थे।

टांगी का उपयोग: उन्होंने निर्भय होकर इस टांगी का उपयोग ब्रिटिश सैनिकों और उनके समर्थक जमींदारों से लड़ने और उन्हें मारने के लिए किया। दावों के अनुसार, उन्होंने अपनी टांगी से कई अंग्रेजों और जमींदारों को मार डाला था।

ऐतिहासिक अवशेष: यह ऐतिहासिक टांगी आज भी उनके परिवार के पास मौजूद है।

4. ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिरोध

कोंका करमाली की गतिविधियों और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें ब्रिटिश सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बना दिया, जिससे ब्रिटिश अधिकारी बहुत परेशान हो गए।

ब्रिटिश अभियान: अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने या मारने के उद्देश्य से उनके गाँव ओरमो में स्थित उनके घर पर लगातार कई बार छापामारी अभियान चलाए।

सफल प्रतिरोध: इसके बावजूद, वे हर बार अंग्रेजों को चकमा देकर चतुराई से बच निकलते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।

5. निधन और ऐतिहासिक विरासत

निधन: कोंका कमर करमाली का निधन 8 जनवरी 1896 को हो गया।

ऐतिहासिक मूल्यांकन: उनके अपार योगदान के बावजूद, इतिहासकारों ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वह स्थान नहीं दिया, जिसके वे सही मायने में हकदार थे। उनका नेतृत्व और बहादुरी उन्हें एक नायक बनाती है, जिनका संघर्ष आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके जैसे योद्धाओं को मुख्यधारा के इतिहास में स्थान देना न केवल न्यायोचित है, बल्कि वर्तमान झारखंड की पहचान और जल-जंगल-जमीन के संघर्ष को समझने के लिए अनिवार्य भी।