संथाली ओलचिकी लिपि में भारत का संविधान
संथाली समुदाय भारत की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है, जो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड सहित सात राज्यों में बड़ी संख्या में केंद्रित है। यह समुदाय बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में भी फैला हुआ है।भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, देश भर में 70 लाख (सात मिलियन) से ज़्यादा लोग संथाली बोलते हैं। इनकी भाषा संथाली एवं लिपि ओलचिकी है।
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12/30/20251 min read
संथाली समुदाय भारत की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है, जो पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड सहित सात राज्यों में बड़ी संख्या में केंद्रित है। यह समुदाय बांग्लादेश, भूटान और नेपाल में भी फैला हुआ है।भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार, देश भर में 70 लाख (सात मिलियन) से ज़्यादा लोग संथाली बोलते हैं। इनकी भाषा संथाली एवं लिपि ओलचिकी है।
ओलचिकी लिपि की खोज 1925 में ओडिशा के मयूरभंज के एक स्कूल टीचर पंडित रघुनाथ मुर्मू ने की थी । मुर्मू ने तर्क दिया कि संतालों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को तभी बचाया जा सकता है जब भाषा की अपनी लेखन प्रणाली हो। उन्होंने व्याकरण की किताबें, नाटक, कविताएं और उपन्यास सहित 150 से ज़्यादा रचनाएं लिखीं। अपने नाटक बिदु चंदन में, उन्होंने ओल चिकी को एक दिव्य उत्पत्ति की कहानी दी।
ओल चिकी लिपि बाएं से दाएं लिखी जाती है, जिसमें अक्षर जुड़े होने के बजाय अलग-अलग रखे जाते हैं। हर अक्षर को संथाली भाषा की प्राकृतिक ध्वनियों से मेल खाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस लिपि में 30 मूल अक्षर हैं, जिन्हें छह स्वरों और 24 व्यंजनों में बांटा गया है। देवनागरी के विपरीत, स्वर स्वतंत्र रूप से लिखे जाते हैं, न कि 'चंद्रबिंदु' जैसे चिह्नों के रूप में।
इसे 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। 2005 में, भारत की साहित्य अकादमी ने संथाली में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए हर साल पुरस्कार देना शुरू किया, इस कदम से समुदाय के साहित्य को संरक्षित करने और उसे ज़्यादा पहचान दिलाने में मदद मिली।
संविधान को संथाली भाषा में अनुवाद करने की कई अनौपचारिक कोसिस की जा चुकी है। पद्मश्री सम्मानित दिगबंर हंसदा ने भारत के संविधान को देवनागरी लिपि में संथाली भाषा में अनुवाद भी किया था । श्रीपति टुडू ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान ओलचिकी मे इसका अनुवाद किया और इसे 2021 में प्रकाशित किया। 2022 में उनके काम का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 89वें एपिसोड में भी किया था।
2023 में CIIL ने आधिकारिक अनुवाद का काम संभाला और कहा कि संविधान दोनों लिपियों में प्रकाशित किया जाएगा- देवनागरी और ओलचिकी ।
अंततः 2025 में ओलचिकी लिपि शताब्दी वर्ष में विधि एवं न्याय मंत्रालय के तत्वाधान में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने अटल जी के जन्म दिवस 25 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति भवन में संथाली भाषा में एक समारोह आयोजित कर ओलचिकी लिपि में भारत के संविधान को प्रकाशित किया ।
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