भारत की राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को IMF ने दिया 'C' ग्रेड

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 2025 की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट बताती है कि भारत को अपने राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (सकल घरेलू उत्पाद और GVA डेटा) के लिए लगातार 'C' ग्रेड मिला है, जो वैश्विक निगरानी में कुछ कमियों को दर्शाता है।

JPSC SPECIAL

12/1/20251 min read

26 नवंबर 2025 को जारी अपनी सालाना आर्टिकल-IV रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों (GDP, GVA आदि) को फिर से 'C' ग्रेड दिया है। यह IMF की चार-स्तरीय स्केल (A, B, C, D) में दूसरा सबसे निचला ग्रेड है। पिछले साल भी यही ग्रेड मिला था, यानी एक साल में कोई सुधार नहीं हुआ।

'C' ग्रेड का मतलब है कि डेटा में कुछ ऐसी कमियाँ हैं जो IMF की अर्थव्यवस्था पर निगरानी करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं।

हालांकि कुल मिलाकर भारत का समग्र डेटा ग्रेड अभी भी 'B' (ब्रॉडली ठीक) बना हुआ है, क्योंकि मौद्रिक, वित्तीय और विदेशी क्षेत्र के आंकड़े मजबूत हैं। तुलना के लिए, चीन को भी राष्ट्रीय लेखा में 'C' ग्रेड ही मिला है।

'C' ग्रेड मिलने के प्रमुख कारण

  • आधार वर्ष 2011-12 बहुत पुराना हो चुका है, अब यह वर्तमान अर्थव्यवस्था की संरचना, खर्च के पैटर्न और सेक्टरों के बदलाव को सही से नहीं दर्शाता।

  • पुरानी गणना विधियाँ इस्तेमाल हो रही हैं, जैसे सिंगल डिफ्लेशन और WPI पर ज्यादा निर्भरता; प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का अभाव है।

  • निवेश (GFCF) का सरकारी-निजी-घरेलू सेक्टर ब्रेकअप बहुत देर से आता है।

  • तिमाही आंकड़ों में मौसमी उतार-चढ़ाव (सीजनल एडजस्टमेंट) का आधिकारिक डेटा नहीं दिया जाता।

  • अनौपचारिक क्षेत्र और कई अन्य हिस्सों का डेटा विस्तृत रूप से उपलब्ध नहीं है।

अन्य आंकड़ों की स्थिति

मुद्रास्फीति (CPI) को 'B' ग्रेड मिला है, पर उसमें भी आधार वर्ष पुराना है। सरकारी वित्त आंकड़ों को भी 'C' ग्रेड ही मिला है।

भारत सरकार का पक्ष और आगे की योजना

सरकार ने इस ग्रेड से असहमति जताई है और कहा है कि हाल के सुधारों को देखते हुए बेहतर ग्रेड मिलना चाहिए था।

अच्छी खबर यह है कि फरवरी 2026 में राष्ट्रीय लेखा, CPI और IIP का नया आधार वर्ष (2023-24 या बाद का) जारी होने वाला है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की नई विधियाँ, नियमित बेंचमार्क रिवीजन, मौसमी समायोजन और विस्तृत सेक्टर ब्रेकडाउन शामिल होंगे। IMF ने भी इन प्रयासों की तारीफ की है।

निष्कर्ष

ठीक दो दिन बाद, यानी 28 नवंबर 2025 को भारत ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए 8.2 प्रतिशत GDP ग्रोथ का आंकड़ा जारी किया, जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। लेकिन IMF का 'C' ग्रेड आने से एक बार फिर डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

नई श्रृंखला सफलतापूर्वक लागू हो गई तो अगले साल ग्रेड 'B' या उससे ऊपर जा सकता है। तब तक यह 'C' ग्रेड भारत की तेज़ रफ्तार वाली ग्रोथ कहानी और उसके आंकड़ों की गुणवत्ता के बीच के अंतर को उजागर करता रहेगा।

© 2025. All rights reserved.

Contact Us

+919608166520

Ranchi

834001